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व्यापारियों को सीलिंग का खौफ दिखाकर कर 50,00,00,00,000 वसूले

MCD ने  पिछले 11 सालो में बाजारों को बेहतर और सीलिंग से हटाने के लिए व्यापारियों से 5 हजार करोड़ रुपए वसूले।

उन्होने इस सारी रकम का इस्तेमाल ऐसे कामो में किया जिसका व्यापारियों से  कोई लेना देना नहीं था जिस मकसद से सरकार ने व्यापारियों से पैसे वसूले थे अगर उसी में खर्च होते हो आज व्यापारियों को सीलिंग का दंश नहीं देखना पड़ता और न उन्हें बेरोजगारी की नौबत अति हलाकि इस रकम को लेकर अधिकारियो में घनी चुप्पी सी छाई हुई है
MCD के कुछ अधिकारीयों से मिली जानकारी और आर टीआई से मिली जानकारी के अनुसार 2007 से लेकर 2018 के मार्च तक MCD ने पूरी दिल्ली के व्यापारियों से करीब 5,018.39 करोड़ रुपए वसूले है 2021 का मास्टर प्लान ये है की कारोबारियों के कन्वर्जन चार्ज को और पार्किंग शुल्क की शकल में इतनी जियादा रकम ली गई और रकम लेने का मकसद था की बाजारों के पास जो बड़ी बड़ी मार्केट है उनके पास  बड़ी पार्किंग बनवाई जाये। बाजारों का विकास ऐसा हो की कारोबारियों को सीलिंग का खौफ ही न रहे।

MCD ने व्यापारियों के पैसे किये खर्च।

लेकिन पूरी जानकारी के अनुसार ये पता चला है के इन पेसो को इस तरह इस्तेमाल किया गया है जिसका व्यापारियों से कोई संबंध नहीं था। कुछ जानकारी से पता चला है की व्यापारियों का पैसा कर्म चरियों के वेतन पर खर्च कर दिया गया है और इसके लिए नियमो में बहुत बदलाव किये गए है यहां तक की करम चरियो के एस्क्रो अकाउंट को जनरल अकाउंट में तब्दील कर दिया गया और यहां से सारे पैसे निकाल कर गोसदनों को दान दी गई और स्लॉटर हाउस तक बनवाये गए। और मुख्यालय पर पैसे खर्च करे और करोड़ो रुपए की बिजली के बिल भुक्तान किये गए और नेताओ ने अपनी वहा वाही के लिए पेंसन बाटी और कर्म चरियों की बकाया राशि लौटाई।
नियमो के अनुसार इस पैसे का इस्तेमाल ट्रेडर्स एसोसिएशनों की सलहा से होना चाहिए था लेकिन हैरान करने वाली बात ये है की एसोसिएशनों से कभी सलहा ही नहीं ली गई। सब व्यापारी इस बात से हैरान है की जिन मार्किटों से कन्वर्जन चार्ज और पार्किंग चार्ज नहीं लेना चहियेता MCD के अफसरों ने सीलिंग का डर दिखाकर वहां से भी करोड़ो रुपए की वसूली की और इसमे पूरानी दिल्ली के स्पेशल एरिया वाले बाजार भी शामिल है और अब इस मामले को लेकर आधिकारिक तोर पर MCD कमिश्नर ऑफिसों से जानकारी लेने का प्रयास क़र रहे है लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक जवाब  नहीं मिला ।