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अन्ना हज़ारे बैठे अनशन पर 5 हजार से भी ज्यादा किसान रामलीला मैदान पहुचे।

इस आंदोलन को जन आंदोलन सत्याग्रह नाम दिया गया है।

अन्ना हजारे लोगों की सेवा के लिए एक बार फिर 7 साल बाद रामलीला मैदान पहुंचे और अनशन का अनुष्ठान किया। रामलीला मैदान में अनशन पर बैठते ही अन्ना ने साफ कहे दिया आम आदमी पार्टी या किसी भी राजनीतिक के नेता सदस्य या समर्थक को अपने इस आंदोलन पे आने से मना कर दिया इस कमेठी के २६ सदस्यों कोर कमेटी ने हर एक सदस्य के १०० रूपये वाले स्टेम पेपर पर साइन करवाया गया है और उस स्टेम पेपर पर लिखा है कि वे सभी लोग किसी रानीतिक के लिए इस आंदोलन से नहीं जुड़े रहे। इस आंदोलन को सफल पूर्वक बना ने के लिए और राज्यों से भी 6500 हजार हलफनामे अन्ना हजारे को भेजे है । किसानो को इस आंदोलन में शामिल होने के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं है । अन्ना हजारे अनशन शुरू करने से पहले सुबह ९ बजे बापू को श्रद्धांजलि देने गए । राजघाट में अन्ना आधा घंटा ठरे। और उस समय उनके समर्थक रामलीला मैदान पहुंचे।  बनाये गए स्टेज के निचे एक कम हाइट का स्टेज बनाया था। जहा पर किसानो को बैठें ने की व्यवस्था थी। स्टेज के पीछे जो तस्वीर लगाई गई थी । वह गाँधी जी की तस्वीर थी । उस तस्वीर पर किसानों की जो मांगे थी। वो भी लिखी हुई थी।

किसानों की मांगे है।

सक्षम किसान
सशक्त लोकपाल
चुनाव सुधर
अन्ना हज़ारे की कृषि मंत्री से मिल कर सब से प्रमुख मांग थी किसानों का कर्ज माफ़ करने की संबंधित है।
इनके जैसी कुछ प्रमुख मांगे लिखी थी गाँधी जी की तस्वीर के निचे। देश के अलग अलग राज्यों के किसानो ने अन्ना हज़ारे को इस आंदोलन का समर्थक दिया। अन्ना हजारे ने ये तो नहीं बताया की जन आंदोलन सत्याग्रह का अनशन कब तक चलेगा। जन आंदोलन सत्याग्रह का माहौल जनलोकपाल आंदोलन जैसा नहीं है। लेकिन देश के अलग अलग राज्यों से 5 हजार से भी ज्यादा किसान पहले दिन रामलीला मैदान पहुंचे।