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इस बीमारी में छोड़ना पड़ता है महिलाओं को अपना घर।

पीरियड्स: आज के समाज में किसी को पीरियड्स के बारे में समझाने की ज़रूरत नहीं है लेकिन इस गाँव में अलग रिवाज को आप जानकर आप हैरान हो जायँगे। कि आज के ज़माने में अभी तक ऐसी सोच वाले लोग है।  और ऐसी प्रथा को माना भी जाता है।
आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गाँव में पीरियड्स के समय में और बच्चे के जन्म के बाद पहले तीन महीने के लिए और पीरियड्स के दिनों में घरों में रहने की अनुमति नहीं दी जाती है. आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले के रोला मंडल के गंताहल्लागोट्टी गांव में यह प्रथा आज भी बदस्तूर जारी है इस गाँव में  120 घर हैं जो ओरुगोल्ला और कादुगोल्ला समुदायों के हैं।

पीरियड्स के दौरान इस गाँव में नहीं करने देते महिलाओ को ये काम :-

  • पीरियड्स के दौरान नदी पार करने पर पाबंदी।

  • स्कूल में भी जाने की अनुमति नहीं।

  • मंदिर में पूजा करने की अनुमति नहीं केवल पुरुष ही मंदिर जाते है।

  • मर्दो से बात करने की अनुमति नहीं।

  • अपने घरो में भी रहने की अनुमति नहीं।

जन्म के बाद तीन महीने के लिए महिलाओ को घर में रहने की अनुमति नहीं है। क्युकी इस गाँव की एक प्रथा है जिससे लोग आज भी मान रहे है उन्हें गांव से दूर ताड़ के पत्तों से बनी झोपड़ी में रहना पड़ता  है। और इस दौरान वहीं अपना खाना बनाना होता है।.डिलिवरी के बाद मां और नवजात बच्चे को बिना किसी सहायता और बुनियादी जरूरतों जैसे बिजली और पानी के अंधेरे झोपड़ी में छोड़ दिया जाता है . उसे वहां तीन महीने तक अपने बच्चे के साथ रहना पड़ता है।