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क्रेन का बैलेंस बिगड़ने से हादसा, लोग चीखते रहे पर बचा नहीं पाए

बीएचयू में एडमिशन प्रकिया चल रही थी और  शाम का वक़्त होने के कारण बनारस के कैंट रेलवे स्टेशन की सड़क पर भीड़ भी बहुत ज्यादा थी। और गाड़िया भी लम्बी कतार में खड़ी हुए थी। कैंट स्टेशन के सामने फ्लाईओवर का काम चल रहा था। एक बड़ी क्रेन से गर्डर को पुल के खड़े ढांचे के ऊपर रखना था।
अचानक से क्रेन का बेलैंस बिगड़ गया और गर्डर रोड पर लगे जाम में फांसी गाड़ियों के ऊपर गिर गया। छह से ज्यादा गाड़ी गर्डर के निचे दब गयी गाड़ियों में बैठे लोग जान बचाने के लिए गुहार भी नहीं लगा सके जो लोग वहा मौजूद थे वह चीख- पुकार करने लगे।  इस खौफनाक मंजर को देखते लोग एक घंटे से ज्यादा समय तक हजारो की भीड़ चिल्लाती रही मगर वह किसी की भी जान नहीं बचा सकते थे क्योकि उस बड़े गर्डर को सिर्फ क्रेन ही हटा सकती थी। गर्डर के निचे आई गाड़िया सड़क से चिपक गयी थी।
पुलिसकर्मी भी चंद लम्हे में मोके पर पहुंच गए लेकिन उस बड़े भरी गर्डर को हटाना उनके वश का भी नहीं था। ऐसे में जो लोग पुल के गिरे हिस्से में दबे हुए थे उन्हें लोग निकलने की कोशिश कर रहे थे । कोई गाड़ी का दवाजा तोड़ने में जुटा हुआ था कोई शीशा तोड़ने में लगा हुआ था। ऐसा मंजर शायद ही काशी ने कभी देखा हो चारो तरफ चीख-पुकार का मंजर बना हुआ था।  घटना घटने के करीब डेढ घंटे बाद बचाव कार्य शुरू हो पाया।
अफसर आये और एनडीआरफ की टीम पहुंची। पुल के निर्माण के लिए गर्डर रखने का काम दिन में करने की वजह से जाम काफी समय तक लगा रहता था और काफी महीनो से ऐसा ही हो रहा था। अफसरों की लापरवाही से आज लोगो की जान भी चली गई। एक दर्जन से ज्यादा लोगो की मौत के बीच कार,टेम्पो,बस में दबे लोगो को देखकर चारो तरफ चीख-पुकार मची लेकिन कोई भी राहत की साँस नहीं ले रहा था। लोग राहत के लिए अफसरों को कोस रहे थे। लोगो का गुस्सा शाम तक सांत हुआ। लोगो का कहना है की गर्डर रखने का काम रात को होना चाहिए।